तिहाड़ जेल में फांसी की सजा से पहले क्या थी निर्भया के दोषियों की आखिरी इच्छा? क्या थी

आप जानते ही होंगे 20 मार्च निर्भया के दोषियों  फांसी दी गयी थी पर आपको पता है तिहाड़ जेल में फांसी की सजा से पहले क्या थी निर्भया के दोषियों की आखिरी इच्छा? क्या थी अगर आप जानना  चाहते है निर्भया के दोषियों को शुक्रवार तड़के तिहाड़ जेल में फांसी दिए जाने के बाद लंबे समय से पीड़िता को इंसाफ मिलने की राह देख रहे लोगों ने राहत की सांस ली। दिसंबर 2012 में एक मेडिकल छात्रा के साथ निर्मम तरीके से गैंगरेप और हत्या के दोषियों को आखिरकार उनके किए की सजा मिल गई, जिससे समाज में जघन्य अपराध की सोच
 रखने वालों के मन में भी डर पैदा होगा।


फांसी से पहले जेल में क्या हुआ
शुक्रवार तड़के चारों को इनके सेल से जगाया गया हालांकि, चारों में से कोई भी सोया नहीं था। इसके बाद सुबह की जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद इनसे नहाने को कहा गया। इसके बाद इनके लिए चाय मंगाई गई लेकिन किसी ने चाय नहीं पी। इसके बाद उनसे आखिरी इच्छा पूछी गई और फिर सेल से बाहर लाने से पहले चारों को काला कुर्ता-पजामा पहनाया गया तथा हाथ पीछे की ओर बांध भी दिए गए थे। इसके बाद चारों को पवन जल्लाद और तिहाड़ जेल के एक कर्मी ने लीवर खींचकर फांसी की सजा दी।

फांसी के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि आज वह बहुत खुशी महसूस कर रही हैं क्योंकि उनकी बेटी को आखिरकार इंसाफ मिल गया। उन्होंने कहा कि निर्भया की मां होने के नाते आज वह गर्व महसूस कर रही है। सात साल पहले जो घटना हुई उससे लोग और देश शर्मसार हुआ था लेकिन आज न्याय मिला है। निर्भया के पिता ने कहा कि देर से ही सही उनको न्याय मिला। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक पिता होने का कर्त्तव्य निभाया है। इंसाफ के लिए दर दर की ठोकरें खाई है लेकिन आखिरकार इंसाफ मिला।

तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने बताया कि सभी चारों दोषियों को ठीक 5:30 बजे फांसी पर लटकाया गया। तिहार प्रशासन के अनुसार रातभर संशय बने रहने के बाद आखिरकार तय समय पर फांसी दी गई। फांसी के लिए दो तख्ते थे और एक तख्त पर दो लोगों को खड़ा किया गया था। उन्होंने कहा कि फांसी के लिए मेरठ से पवन जल्लाद को बुलाया गया था।

तिहाड़ जेल में फांसी की सजा से पहले क्या थी निर्भया के दोषियों की आखिरी इच्छा? क्या थी 
तिहाड़ जेल के अधिकारी ने बताया कि दोषियों ने अधिकारियों के समक्ष कोई आखिरी इच्छा जाहिर नहीं की थी। फांसी दिए जाने से पहले उनसे उनकी आखिरी इच्छा पूछी गई थी। जेल की नियामवली के अनुसार अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट या अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कैदी की वसीयत सहित किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए जा सकते हैं या उसे संलग्न किया जा सकता है।


चारों दोषियों के शवों को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए आठ बजे भेजा जाएगा और उसके बाद सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को परिजनों को सौंपा जाएगा। गौरतलब है कि पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों की ओर से फांसी टलवाने के लिए दायर याचिका गुरुवार को खारिज कर दी थी। जिसके बाद दोषियों के वकील ने फांसी की सजा पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जिसे शीर्ष अदालत ने भी खारिज कर दिया और उसके बाद तय समय पर फांसी दे दी गई।




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